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दास कैपिटल I-IV · घोषणापत्र · 1848-1894

कार्ल मार्क्स

पूर्वजविचलित

लगान-अधिग्रहण यंत्र तथा फ़ेटिशवाद-समालोचना प्रदान करता है; श्रम-मूल्य सिद्धांत भीतर से अस्वीकृत, क्रांति उसकी अपनी प्रमेयों द्वारा अस्वीकृत।

पठित संस्करण। दास कैपिटल खंड I-III तथा अधिशेष-मूल्य के सिद्धांत, और कम्युनिस्ट घोषणापत्र, पूर्णतः पढ़े गए।

हमने क्या लिया

मूल्य-और-लगान का गहनतम संवादी। वस्तु-फ़ेटिशवाद की समालोचना समूची पुनर्रचना की गहनतम पूर्वज है: मूल्य-सदिश वह स्थायी अ-फ़ेटिशीकरण है जिसे मार्क्स की दृष्टि में वस्तु-उत्पादन अवरुद्ध कर देता है। दास कैपिटल का लगान-सिद्धांत इस मत का लगान-अधिग्रहण यंत्र बन जाता है: लगान-मापक, पुनरुत्पाद्यता-अग्निभित्ति (लगान अ-पुनरुत्पाद्य स्थिति से चिपकता है, पुनरुत्पाद्य सामर्थ्य से नहीं), कीमत-तटस्थता का प्रमाण, तथा पूँजीकरण-प्रमेय जो दर्शाती है कि अग्र-प्रवाह अधिग्रहण परिसंपत्ति को बिना ज़ब्ती के अवस्फीत कर देता है।

हम कहाँ विचलित होते हैं, एवं कैसे उत्तर देते हैं

श्रम-मूल्य सिद्धांत भीतर से अस्वीकृत है: मार्क्स की अपनी रूपांतरण-समस्या दर्शाती है कि श्रम-काल कोई प्रयोज्य मापदंड नहीं, अतः मापित प्रभाव तथा मतदान उसका स्थान ले लेते हैं। क्रांति उसकी अपनी पूँजीकरण-प्रमेय द्वारा अस्वीकृत है, और आदेश-अर्थव्यवस्था उसके अपने «एक विराट कारख़ाना» अपात्रता-कारक द्वारा। फ़ेटिशवाद का आरोप, मूल्य-सदिश पर पलटकर, त्रयी-सूत्र के प्रतिलोमन से उत्तरित होता है: मूल्य एक घोषित मतदान द्वारा गठित होता है, किसी वस्तु-गुण के रूप में प्राकृतीकृत नहीं।

निवल स्थिति

सर्वाधिक उपयोगी प्रतिपक्षी और, मूल्य तथा लगान के यंत्र के विषय में, गहनतम पूर्वज: एक तीसरी अवस्थिति जो अनर्जित का समाजीकरण करती है और व्यक्ति को शिक्षित करती है, बिना साधनों का राष्ट्रीयकरण किए या श्रम की भर्ती किए।

प्रत्येक स्थिति मूल स्रोत पर पढ़ी जाती है। सम्पूर्ण पंजिका यहाँ देखें वंशक्रम एवं समालोचना · तंत्र.